सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई राम जन्मभूमि विवाद पर सुनवाई

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राम मंदिर टाइटल सूट पर देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई शुरू हो गई है। जस्टिस एस ए बोबड़े की तबीयत खराब होने की वजह से सुनवाई टाल दी गई थी। राम मंदिर टाइटल सूट की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच कर रही है। इस मामले में हर किसी की निगाह टिकी है कि अदालत का रुख कैसा रहता है।

अदालत में राम मंदिर टाइटल सूट

पांच जजों की संवैधानिक बेंच कर रही है सुनवाई। जस्टिस यू यू ललित के नाम पर ऐतराज के बाद दोबारा बेंच का हुआ गठन। बेंच में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस एस बोबड़े, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस ए नजीर शामिल हैं। इस मामले में 27 जनवरी को सुनवाई होनी थी। लेकिन जस्टिस एस ए बोबड़े की अनुपस्थिति की वजह से मामले को टाल दिया गया। बेंच, सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच 2.77 एकड़ भूमि की टाइटल सूट के साथ 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 और अपीलों पर सुनवाई करेगी।
याचिका में कहा गया है कि वैसे भी सिर्फ राज्य सरकार को ही अपने प्रदेश के भीतर धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन से संबंधित मामलों के लिये प्रावधान करने का अधिकार है। वकील शिशिर चतुर्वेदी और संजय मिश्रा तथा अन्य ने याचिका में कहा था कि अयोध्या के कुछ क्षेत्रों का अधिग्रहण कानून, 1993 संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रदत्त हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों और उनके संरक्षण का अतिक्रमण है। मैं अयोध्या हूं…सरयू में बह चुका है इतना पानी
इस याचिका से एक सप्ताह पहले 29 जनवरी को केंद्र ने एक याचिका दायर करके सुप्रीम कोर्ट से उसके 2003 के फैसले में सुधार करने और अयोध्या में विवादित ढांचे के आसपास की गैर विवादित 67 एकड़ भूमि उनके असली मालिकों को लौटाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने याचिका में कहा था कि अयोध्या में छह दिसंबर, 1992 को कार सेवकों द्वारा विवादित ढांचा गिराए जाने से पहले यह 2.77 एकड़ के विवादित परिसर के अंदर 0.313 भूखंड पर स्थित था। सरकार ने 2-77 एकड़ के भूखंड सहित 67.703 एकड़ भूमि का एक कानून के माध्यम से अधिग्रहण कर लिया था। इसमें 42 एकड़ गैर विवादित वह भूमि भी शामिल थी जिसका स्वामित्व राम जन्म भूमि न्यास के पास है।