नाले के पानी से श्यामाराव ने 5 साल पहले ही बना ली थी रसोई गैस, प्रधानमंत्री ने की थी तारीफ

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देश में इन दिनों कचरे और नाले के गंदे पानी से रसोई गैस बनाने को लेकर बवाल मचा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां अपने भाषण में कचरे और नाली के गंदे पानी से रसोई गैस बनाने का जिक्र किया तो विपक्ष उनके इस बयान का मजाक बनाने पर उतारू हो गया, लेकिन राजधानी रायपुर के एक सामान्य मेकेनिकल कॉन्ट्रेक्टर श्यामराव शिर्के ने 5 साल पहले ही गंदे नाली के पानी से रसोई गैस बनाकर इतिहास रचा था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस आम आदमी की तारीफ भी अपने भाषण में की है।

राजधानी रायपुर के तंग से मोहल्ले चंगोरा भाटा में वीएनएस संवाददाता जब श्यामराव शिर्के के घर पहुंचा तो वे अपनी रसोई में चाय बनाते मिले। पेशे से मेकेनिकल कॉन्ट्रेक्टर श्यामराव कोई छोटी हस्ती नहीं हैं, बल्कि ये 11वीं तक पढ़े एक ऐसे वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने नाले के गंदे पानी से रसोई गैस बनाकर एक अनोखा अविष्कार किया है।

इस अनोखे आविष्कार के चलते इन दिनों उनका नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुबान पर चढ़ा हुआ है। इतना ही नहीं, इन्हें तो इसके लिए पीएमओ से बाकायदा रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन फोन भी किया गया है।

श्यामराव बताते हैं कि 5 साल पहले उन्होंने नालों से बहते हुए गंदे पानी को देखा तो उस पानी से उन्हें बुलबुले निकलते दिखाई दिए। तभी श्यामराव को लगा कि नाले के इस गंदे पानी में कोई गैस जरूर है और जब उन्होंने और अधिक रिसर्च की तो उन्हें इस गैस से रसोई गैस बनाने का आइडिया आया। इसके बाद उन्होंने नाले के गंदे पानी से रसोई गैस बनाकर उससे करीब 6 महीने तक 20 लोगों का रोजाना चाय-नाश्ता और खाना भी बनाया है।

श्यामराव बताते हैं कि गैस जमा करने का जुगाड़ू उपकरण बनाने के लिए उन्होंने पानी के तीन कंटेनरों को आपस में जोड़कर उसमें एक वॉल्व लगा दिया और इन तीनों कंटेनर के नीचे उन्होंने जाली लगा दी, ताकि नाले से बहने वाला कचरा ड्रम में ना आए और फिर उन्होंने इस कंटेनर को नाले से बहते हुए पानी के ऊपर रख दिया। फिर उसे पाइप के जरिये गैस चूल्हे से जोड़ दिया, बस क्या था कंटेनरों में गैस जमा हुई और गैस चूल्हा जलने लगा।श्यामराव बताते हैं कि उन्होंने इस उपकरण को अपने मित्र भारती बंधु के घर पर लगा दिया और वहां इस गैस से रोजाना 15-20 लोगों का चाय-नाश्ता और खाना बनने लगा। उनके इस आविष्कार को देखकर छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने उनको इस प्रोजेक्ट को बड़े पैमाने पर तैयार करने के लिए मदद की और उनके आविष्कार का पेटेंट भी करवाया।

उन्होंने कहा, ‘ये उपकरण मैंने अपने मित्र के घर लगवाया। उससे 20 लोगों का रोजाना चाय-नाश्ता और खाना बनने लगा। 6 महीने तक ये इसी तरह रहा, लेकिन बाद में नगर निगम ने इस उपकरण को बिना किसी सूचना के नाले से हटा दिया।’

श्यामराव ने बताया कि हाल ही में पीएमओ से उन्हें फोन आया और उन्होंने बधाई देते हुए आगे रिसर्च बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। वे बताते हैं कि 18 से 20 हजार में एक ऐसा स्थाई उपकरण बनाया जा सकता है, जिससे रोजाना 20 लोगों का खाना बनाया जा सके और इसका सालों तक कोई मेंटेनेंस खर्च भी नहीं होगा। श्यामराव कहते हैं, ‘अभी तक मैं मुफलिसी की जिंदगी जी रहा था, लेकिन अब मोदी जी से निवेदन करता हूं कि वो मुझे मदद करें, मैं उनकी विचारधारा से एक कदम आगे बढ़कर काम करूंगा।’